क्यों बार बार पानी से आँखें धोना फायदेमंद नहीं है? डॉक्टर से जानें आँखों से जुड़ी इन 5 मिथकों की सच्चाई

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    क्यों बार बार पानी से आँखें धोना फायदेमंद नहीं है? डॉक्टर से जानें आँखों से जुड़ी इन 5 मिथकों की सच्चाई

    दरअसल, आंख हमारे शरीर का एक अनमोल अंग हैं। जिस से हम किसी भी सुंदर वस्तु को देख सकते हैं। हमको आपकी आँखों की हमेशा देखभाल करनी चाहिए, क्योंकि इसके बिना कोई भी व्यक्ति एक बेहतर जीवन जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता है। अच्छा जीवन जीने के लिए अपनी आंखों को हेल्दी रखना बहुत ज्यादा जरूरी होता है। आपको बता दें कि कमजोर आँखों की वजह से ज्यादातर लोगों की आँखों पर चश्मा लगवाना पड़ता है। दरअसल आज के समय में कई लोगों को मोतियाबिंद की समस्या या फिर आंखों से जुड़ी और समस्याएं काफी ज्यादा आम हो गई है। पर कई लोग अपनी आँखों को सेहतमंद रखने के लिए कई तरह की सलाह देते हैं। पर कई मामलों में उन बातों को अपनाना आपकी आँखों के लिए हानिकारक भी हो सकता है। तो आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से विस्तार से जानते हैं, कि आखिर आंखों के स्वास्थ्य से जुड़े मिथक और सच्चाई क्या है?

    आंखों से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई 

    मिथक 1. अपनी आँखों को साफ रखने के लिए बार-बार पानी से धोना बेहतर होता है।

    सच्चाई : दरअसल अपनी आँखों को साफ़ रखने के लिए बार बार पानी से धोना बिलकुल भी सही नहीं होता है। आमतौर पर इसकी वजह से आपकी आंखों में सूखापन, एलर्जी और इंफेक्शन जैसी संसाएयों की सम्भावना बढ़ सकती है। आपको बता दें की आप सिर्फ दिन में एक बार अपनी आंखों को पानी से धो सकते हैं, लेकिन सिर्फ और सिर्फ साफ और ठंडे पानी से।

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    मिथक 2 . हम अपनी आँखों पर कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर सो सकते हैं।

    सच्चाई : आमतौर पर अपनी आँखों पर कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर सोना, दरअसल आपकी आँखों लिए बिलकुल भी सुरक्षित नहीं होता है। इसलिए आपको अपनी आँखों पर कॉन्टैक्ट लेंस पहनकर कभी भी सोना नहीं चाहिए, यहां तक कि 5 मिनट तक के लिए भी नहीं। वास्तव में इसकी वजह से आपकी आंखों को चोट लग सकती है और आपको अंधेपन की समस्या भी हो सकती है। 

    मिथक 3. चश्मा पहनने से आप उन पर ही निर्भर हो जाते हैं।

    सच्चाई : दरअसल कई लोगों का मानना है, कि एक बार अपनी आँखों पर चस्मा लगने के बाद आपको इस को पहनने की आदत हो जाती है और इसके बाद चस्मा नहीं उतरता है। बता दें कि ऐसा बिलकुल भी नहीं है, चश्मा पहनने से इसकी आदत नहीं बनती या फिर आपकी आंखों की शक्ति कमजोर नहीं होती है। हालाँकि चस्मा आपको बिलकुल साफ देखने में आपकी मदद करता है और इसके बिना आपको धुंधला नज़र आ सकता है। आमतौर पर मौजूदा आंख के नंबर की वजह से आपको इस की आदत नहीं लगती है। 

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    मिथक 4. आई ड्रॉप की मदद से मोतियाबिंद को ठीक किया जा सकता है।

    सच्चाई : दरअसल यह सिर्फ एक मिथक है, की आई ड्रॉप का इस्तेमाल करके मोतियाबिंद जैसी गंभीर आंखों की समस्या को ठीक किया जा सकता है। आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें कि ऐसा कोई भी आई ड्रॉप नहीं है, जो मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्या को ठीक कर सके। आमतौर पर केवल सर्जरी ही इसका एकमात्र प्रभावी इलाज होता है। दरअसल सर्जरी के दौरान आपकी आखों के अंदर के लेंस को बदल दिया जाता है, तन की आपको अपनी आँखों से बिलकुल साफ़ दिखाई दे सके।

    मिथक 5.- मोतियाबिंद का ऑपरेशन तभी किया जाना चाहिए जब यह पूरी तरह से बढ़ जाए।

    सच्चाई : बता दें कि यह एक पुरानी मान्यता है कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन हमको तभी करवाना चाहिए जब ये पूरी तरह से बढ़ जाए। पर आमतौर पर आज के समय में कई तरीकों का इस्तेमाल करके आंखों की सर्जरी करके इसके शुरुआती दौर में ही मोतियाबिंद की समस्या को खत्म किया जा सकता है। असल में समय पर मोतियाबिंद की सर्जरी करने से व्यक्ति की  आँखों को बेहतर रिकवरी और बेहतर रिजल्ट मिलता है।

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    निष्कर्ष

    आँखें हमारे शरीर का सबसे अहम हिस्सा होती हैं, जिसकी वजह से हम दुनिया के हर सुंदर से सुंदर दृश्य को देख सकते हैं। इस वजह से इसकी सही तरीके से देखभाल बहुत ज्यादा जरूरी होता है। क्या रोज पानी से आंखें धोना ठीक है या क्या कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर सो सकते हैं? इस तरह के सवालों को लेकर कई तरह के मिथक लोगों में फैला हुआ है। हमारी आँखों का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी होता है, इसलिए आंखों के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी बात पर भरोसा करने से पहले आई स्पेशलिस्ट से सलाह करें और इसके साथ ही समय पर इसका सही इलाज पाने की कोशिश करें। अगर आपको भी इसके बारे में जानकारी प्राप्त करनी है, कि किन बातों को अपनाना आँखों के लिए हानिकारक हो सकता है और अगर आपको भी आँखों से संबंधित कोई भी समस्या है और आप इस समस्या से काफी ज्यादा परेशान हैं और आप इसका इलाज ढूंढ रहे हैं, तो आप आज ही क्लिनिक बाय चॉइस में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके इलाज के बारे में जानकारी ले सकते हैं।