आखिर क्या होता है एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट (ABI)? डॉक्टर से जानें, दिल की सेहत की जांच के इस आसान तरीके के बारे में!

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    आखिर क्या होता है एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट (ABI)? डॉक्टर से जानें, दिल की सेहत की जांच के इस आसान तरीके के बारे में!

    दरअसल, आज के समय में शरीर से जुड़ी समस्याओं के कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिस में वह काफी ज्यादा हैरान और परेशान हो जाता है। ऐसे में, न केवल उसका काम, बल्कि जीवन भी बुरी तरीके से प्रभावित हो जाता है। आम तौर पर, शरीर से जुड़ी कोई भी समस्या हो उस पर महत्वपूर्ण ध्यान देना अति आवश्यक होता है। इस दौरान दिल से जुड़ी समस्या में आपको काफी दिक्क्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अगर समय पर ध्यान न दिया गया, तो यह जीवन के लिए काफी ज्यादा हानिकारक भी साबित हो सकता है। इसलिए, शरीर से जुड़ी हर समस्या पर ध्यान देना और उसका समय पर इलाज करवाना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। 

    दरअसल, आज लोगों में दिल से जुड़ी समस्या काफी आम हो गई है। इस समस्या के कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे कि गलत खान पान का सेवन करना, डेस्क जॉब करना और जीवन में एक्सरसाइज की कमी होना आदि। आम तौर पर, आज इन्हीं कारणों के चलते लोगों में दिल से जुड़ी समस्या तेजी से बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार, हमारे भारत में आज लगभग 3 करोड़ से भी ज्यादा लोग कोरोनरी हार्ट डिजीज की समस्या से पीड़ित हैं। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि भारत में साल 2021 में लगभग 28.7 लाख लोगों की जान केवल हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों के कारण ही गई थी। इसी के चलते आपको अपने दिल की देखभाल करने में किसी भी तरह की कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। दिल हमारी जिंदगी में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण स्थान रखता है, जिसमें अगर दिल को किसी भी तरह की समस्या होती है, तो इससे हमारा सम्पूर्ण स्वास्थ्य खराब हो जाता है। दिल हमारे शरीर में खून को पंप करता है और शरीर को चालू रखने में काफी ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका को निभाता है। आम तौर पर, इसके सेहतमंद होने पर न केवल शरीर एक्टिव रहता है, बल्कि इससे शरीर में ताकत बनी रहती है। 

    दिल शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जिसमें होने वाली समस्या व्यक्ति के पूरे जीवन को बुरी तरीके से प्रभावित कर सकती है और कई मामलों में उनको मौत

    के घाट भी उतार सकती है। इसलिए, दिल से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेना आपकी पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। आम तौर पर, जब कभी भी भारत में दिल से जुड़ी समस्याओं की बात की जाती है, तो ऐसे में अक्सर लोग दिल की जांच के नाम पर केवल ईसीजी या फिर खून की जांच करवा लेते हैं, जो दिल की सेहत के लिए पर्याप्त नहीं होता है। पर, हम आपको एक ऐसे टेस्ट के बारे में बताएँगे, जो बिना किसी मुश्किल प्रक्रिया के दिल और ब्लड सेल्स की सेहत की जानकारी दे सकता है। इसमें एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट (ABI) शामिल है। ऐसे में, बहुत से लोग जानना चाहते हैं, आखिर ABI टेस्ट क्या होता है? दरअसल, डॉक्टर के अनुसार ABI टेस्ट हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारी का पता करने में आपकी काफी ज्यादा सहायता करता है। आम तौर पर, ABI टेस्ट उन लोगों के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है, जिन लोगों को पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या फिर धमनियों में ब्लॉकेज की समस्या होती है। 

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    ABI टेस्ट क्या होता है?

    आम तौर पर, ABI जिसे एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट के नाम से जाना जाता है। इस टेस्ट के माध्यम से हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारियों के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। दरअसल, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च के अनुसार, एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट एक बहुत ही आसान और बिना चीरे या फिर बिना सर्जरी वाला टेस्ट माना जाता है। जो मरीज के लिए काफी ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। आम तौर पर, इस टेस्ट के माध्यम से मरीज के पैर और बांह के ब्लड प्रेशर की तुलना करके दिल से जुड़ी बीमारियों का पता लगाने की पूरी पूरी कोशिश की जाती है। दरअसल, इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य धमनियों में किसी भी तरह की कोई रुकावट तो नहीं इसके बारे में जानकारी प्राप्त करना होता है, विशेष तौर पर, इसमें पैरों की धमनियों की जांच की जाती है। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि पैरों की धमनियों में होने वाली किसी भी तरह की ब्लॉकेज पेरिफेरल आर्टरी डिजीज का लक्षण होता है। अगर इस समस्या पर समय रहते ध्यान न किया जाए, तो यह समस्या आगे चलकर हार्ट अटैक या फिर स्ट्रोक जैसी समस्या का कारण बनती है। 

    ABI टेस्ट को किस तरह किया जाता है? 

    ABI टेस्ट काफी ज्यादा आसान और 10 से 15 मिनट में पूरी तरीके से हो जाता है। इस टेस्ट के दौरान मरीज को किसी भी तरह का दर्द या फिर कोई असहजता महसूस नहीं होती है। डॉक्टर के अनुसार, निम्नलिखित चरणों के अनुसार इस टेस्ट को मरीज के ऊपर किया जाता है: 

    1. इस टेस्ट के दौरान मरीज को सबसे पहले आराम से बेड पर लिटाया जाता है।

    2. इसके बाद डॉक्टर द्वारा मरीज की बांह और टखनों पर ब्लड प्रेशर कफ को लगाया जाता है। 

    3. इसमें एक डॉप्लर डिवाइस की सहायता के साथ ब्लड फ्लो की जांच या फिर उसको मापा जाता है।

    4. ऐसे में, दोनों जगह के ब्लड प्रेशर के अनुपात को निकाला जाता है और इसी को मेडिकल भाषा में ABI स्कोर कहा जाता है।

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    एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स टेस्ट कब और कितनी बार किया जाना चाहिए? 

    दरअसल, डॉक्टर का इस पर कहना है, कि जो मरीज हाई रिस्क की कैटेगरी में शामिल होते हैं, दरअसल उनको तो साल में एक बार एंकल-ब्रेकियल इंडेक्स (ABI) टेस्ट महत्वपूर्ण रूप से जरूर करवाना चाहिए। यह न केवल दिल के लिए बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। 

    1. जिन लोगों की उम्र लगभग 65 साल से ऊपर की होती है, दरअसल उन लोगों को नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करवानी चाहिए। 

    2. उन लोगों को यह टेस्ट करवाना चाहिए, जो डायबिटीज या फिर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से पीड़ित होते हैं। 

    3. स्मोकिंग करने वाले लोगों को भी यह टेस्ट महत्वपूर्ण रूप से करवाने की जरूरत होती है।

    निष्कर्ष: दिल शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिस का सेहतमंद होना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। दिल से जुड़ी समस्या एक व्यक्ति के जीवन के लिए घातक भी साबित हो सकती है। इसमें, दिल का दौरा पड़ना एक खतरनाक और रक बहुत आम समस्या है, जिसमें सभी वर्ग के लोग शामिल हो सकते हैं। दिल से जुड़ी समस्याएं हमारे खान-पान और गलत जीवनशैली के कारण ही होती हैं। इसलिए, अपने दिल को सेहतमंद रखने के लिए इन इन आदतों में सुधार करना और सेहतमंद खाने का सेवन करना बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में आप दिल से जुड़ी समस्याओं का पता करने के लिए ABI टेस्ट करवा सकते हैं। यह टेस्ट आपको बिना किसी मुश्किल प्रक्रिया के दिल और ब्लड सेल्स की सेहत की जानकारी दे सकता है। ऐसे में, यह टेस्ट हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारी का पता लगाने में आपकी काफी मदद कर सकता है। स्मोकिंग करने वाले लोगों के लिए ABI टेस्ट काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। इस टेस्ट के माध्यम से धमनियों में ब्लॉकेज की जानकारी प्राप्त होती है। दरअसल, अगर आप इस टेस्ट के बारे में और जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं और दिल से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या की जांच करवाना चाहते हैं, तो इसके लिए आप क्लिनिक बाय चॉइस में जाकर अपनी अपॉइंटमेंट को बुक करवा सकते हैं और इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल!

    प्रश्न 1. ज्यादा हार्ट अटैक सुबह के समय ही क्यों आते हैं?

    दरअसल, आपकी जानकारी के लिए आपको बता दें, कि सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक के बीच हार्ट अटैक यानी कि दिल का दौरा पड़ने का खतरा आम वक्त के मुकाबले काफी ज्यादा होता है। आम तौर पर, ऐसा शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक की वजह से होता है, जो सुबह उठते ही ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट की रफ़्तार को काफी ज्यादा बड़ा देती है, जिसकी वजह से दिल पर अचानक से भारी दबाव पड़ता है, जिसके कारण व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ता है। 

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    प्रश्न 2. अपने दिल को सेहतमंद रखने के लिए किन चीजों का सेवन किया जा सकता है? 

    दरअसल, अगर आप अपने दिल को किसी भी समस्या से दूर और सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो इसके लिए आप अपनी रोजाना की डाइट में हरी-भरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज, और ओमेगा-3 से भरपूर भोजन को शामिल कर सकते हैं। इससे दिल की सेहत बनी रहेगी। 

    प्रश्न 3. दिल की सेहत के मामले में किन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए? 

    दरअसल, जहा बात दिल के स्वास्थ्य की आ जाये, तो ऐसे में सावधान रहना और भी ज्यादा महतवपूर्ण हो जाता है। ऐसे में, दिल को सेहतमंद रखने के लिए आपको अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में से कुछ चीजों को तुरंत निकालकर दूर कर देना चाहिए। नमक, चीनी, ट्रांस फैट, प्रोसेस्ड मीट और रिफाइंड कार्ब्स जैसी चीजों को आपको अपनी डाइट में से निकाल देना चाहिए। क्योकि, इनका सेवन दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर का सबसे बड़ा कारण बनता है।

    प्रश्न 4. क्या बच्चों को भी दिल का दौरा पड़ सकता है?

    दरअसल, हाँ बच्चों को भी दिल का दौरा पड़ सकता है, पर येस्को के मुकाबले यह बहुत रेयर माना जाता है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिस में जन्मजात दिल की बीमारी, जेनेटिक कारण या फिर खराब लाइफस्टाइल जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। 

    प्रश्न 5. दिल की धड़कन किस वक्त धीमी हो जाती है? 

    दरअसल, आपकी जानकरी के लिए आपको बता दें, कि एक व्यक्ति के दिल की धड़कन गहरी नींद के वक्त, आराम करते वक्त या फिर नियमित रूप से भारी व्यायाम करते वक्त दिल की धड़कने काफी ज्यादा धीमी हो जाती हैं। आमतौर पर, यह एक शरीर की सामान्य प्रक्रिया होती है। 

    प्रश्न 6. खेल के दौरान दिल की धड़कन तेज हो जाती है या फिर धीमी? 

    आपको बता दें, कि खेल या फिर किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि जिसमें दौड़ना और व्यायाम करना शामिल है। दरअसल इस तरह की स्थिति के दौरान एक व्यक्ति की मांसपेशियों को काफी ज्यादा ऑक्सीजन और ऊर्जा की महत्वपूर्ण रूप से जरूरत होती है। ऐसे में, दिल शरीर की इस जरूरत को पूरा करने के लिए तेजी से पंप करने लग जाता है। जिसमें दिल की धड़कने हद से ज्यादा तेज हो जाती है। इसलिए, इस बात से यह साफ है, कि खेल के दौरान व्यक्ति की धड़कने तेज हो जाती हैं, न कि धीमी।